पाकिस्तान में मस्जिद पर हमला: उपमहाद्वीप में आईएसआईएस की बढ़ती छाया
आईएसआईएस-के (ISIS-K) से उत्पन्न खतरा वास्तविक है और लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान में इसकी दोबारा सक्रियता पूरे क्षेत्र—विशेष रूप से भारत—के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। यह खतरा तब और बढ़ जाता है, जब पाकिस्तान एक बार फिर गुप्त रूप से आईएसआईएस-के को कश्मीर की ओर मोड़ने का प्रयास करे। जो घटना अलग-थलग आतंकी वारदात प्रतीत होती है, वह वास्तव में एक व्यापक और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है, जिसके प्रति निरंतर सतर्कता आवश्यक है। पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा में अस्थिरता, सीमा-पार आतंकी गतिविधियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है और भारत व उससे आगे के क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले नए आतंकी मॉड्यूल मजबूत हो सकते हैं।
लगभग पाँच वर्षों के बाद, इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने उपमहाद्वीप में एक उच्च-तीव्रता वाला आतंकी हमला किया है। पाकिस्तान में एक शिया मस्जिद को निशाना बनाते हुए किए गए इस हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करीब 170 लोग घायल हुए। इससे पहले इसी तरह के बड़े हमलों में 2023 के खार धमाके, 2022 में पेशावर की मस्जिद पर हमला (जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए थे) और 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के दौरान एबी गेट पर हुआ विस्फोट शामिल हैं, जिसमें 170 से अधिक लोगों की जान गई थी।
एक लंबे अंतराल के बाद, आईएसआईएस-खुरासान (आईएसआईएस-के) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर जनहानि करने की अपनी क्षमता दिखाई—इस बार उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा के दौरान किए गए आत्मघाती हमले के जरिए। भले ही यह घटना अलग-थलग प्रतीत हो, लेकिन इसे इसी रूप में देखना एक गंभीर भूल होगी। खुरासानी नेटवर्क की बदलती रणनीति और दक्षिण एशिया में स्थायी आधार बनाने की उसकी कोशिशें, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गहरी चिंता पैदा करती हैं।
खुरासानियों का संघर्ष
अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद, आईएसआईएस-के को उपमहाद्वीप में अपने प्रभाव का विस्तार करने का सीमित अवसर मिला। उसका अभियान पहले ही काबुल के स्कूलों पर हमलों से शुरू हो चुका था और अगस्त 2021 में एबी गेट हमले के साथ चरम पर पहुँचा।
2021 के आंकड़े आईएसआईएस-के की गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्शाते हैं—समूह ने अफगानिस्तान में 334 हमले किए, जबकि 2020 में यह संख्या 83 थी, जिनमें पाँच आत्मघाती हमले शामिल थे। हालांकि, 2022 और 2023 के दौरान तालिबान की लगातार जवाबी कार्रवाइयों ने आईएसआईएस-के को काफी कमजोर कर दिया और उसके कई प्रमुख नेताओं को मार गिराया गया। 2023 की शुरुआत में तालिबान ने आईएसआईएस-के के सैन्य प्रमुख क़ारी फ़तेह और वरिष्ठ विचारक व अंतरिम नेता अबू साद मोहम्मद खुरासानी को मार दिया।
तालिबान के बढ़ते दबाव के कारण, आईएसआईएस-के ने अधिक गुप्त तरीके से काम करना शुरू कर दिया और छोटे-छोटे गहरे नेटवर्क (सेल) बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि कम तीव्रता वाले हमले किए जा सकें। लेकिन यह रणनीति भी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। नंगरहार और कुनार जैसे पारंपरिक गढ़ों तथा शहरी क्षेत्रों में तालिबान की खुफिया पैठ और लगातार छापों के कारण संगठन और अधिक बिखर गया। नतीजतन, अफगानिस्तान में आईएसआईएस-के की गतिविधियाँ अब ज्यादातर वैचारिक और राजनीतिक हस्तियों की लक्षित हत्याओं तक सीमित रह गई हैं।
पाकिस्तान की ओर झुकाव
2022 से आईएसआईएस-के ने धीरे-धीरे अपना परिचालन फोकस काबुल से हटाकर पाकिस्तान की ओर मोड़ दिया। शुरुआत में उसने कम तीव्रता वाले हमले किए, लेकिन कुछ ही महीनों में उसने बड़े पैमाने पर जनहानि वाले हमले शुरू कर दिए—जिनमें पेशावर की मस्जिद पर हमला सबसे प्रमुख रहा, जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हुए। 2022 के दौरान पाकिस्तान में आईएसआईएस-के की हमलों की रफ्तार तेज बनी रही।
हालांकि, उसी वर्ष के अंत तक उसकी गतिविधियों में गिरावट आने लगी। इसके लगभग एक साल बाद, खैबर पख्तूनख्वा के खार में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) की रैली के दौरान आत्मघाती हमला किया गया, जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए।
2024 में आईएसआईएस-के ने मध्य एशिया की ओर बाहरी विस्तार शुरू किया, जबकि पाकिस्तान के भीतर लक्षित और कम तीव्रता वाले हमले जारी रखे। यह पैटर्न एक सोची-समझी रणनीति को दर्शाता है—कमजोर सुरक्षा वातावरण का फायदा उठाना, उपयुक्त मौके का इंतजार करना और फिर अपनी प्रासंगिकता दिखाने के लिए चुनिंदा हमले करना।
अफ-पाक क्षेत्र में रणनीतिक उद्देश्य
आईएसआईएस-के लगातार गुप्त भर्ती और लक्षित हत्याओं के जरिए अपनी मौजूदगी दिखाने की कोशिश करता रहा है, जिनके बीच-बीच ऐसे बड़े हमले किए जाते हैं जो अधिकतम दहशत फैलाने के लिए होते हैं। यह रणनीति आवृत्ति से अधिक घातक प्रभाव को प्राथमिकता देती है—जो आईएसआईएस-शैली के अभियानों की पहचान है।
2022 और 2023 के दौरान पाकिस्तान में आईएसआईएस-के के हमले और अधिक घातक हो गए। इसका कारण था पाकिस्तान का बिगड़ता सुरक्षा वातावरण—जहाँ बलोच उग्रवादी समूहों की गतिविधियाँ बढ़ रही थीं और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ संघर्षविराम समाप्त हो चुका था। जुलाई 2023 में, जब टीटीपी और बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमले चरम पर थे, उसी दौरान आईएसआईएस-के ने खार बम धमाके किए और पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की व्यस्तता का लाभ उठाया।
इसी तरह की स्थिति 2025 में भी देखने को मिली। बीएलए द्वारा मार्च में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन अपहरण से शुरू हुए अभियानों और टीटीपी की गतिविधियों के तेज होने के बीच, आईएसआईएस-के ने खैबर पख्तूनख्वा में दारुल उलूम मस्जिद पर हमला किया, जिसमें प्रमुख मौलवी और तालिबान समर्थक हामिद-उल-हक़ हक्कानी की हत्या कर दी गई। इसे तालिबान की वैधता को चुनौती देने का जानबूझकर किया गया प्रयास माना गया।
आईएसआईएस-के का मुख्य उद्देश्य अफ-पाक सीमा क्षेत्र में अफगानिस्तान और पाकिस्तान—दोनों में अपनी परिचालन क्षमता बनाए रखना है। इसके अंतर्गत तालिबान की सत्ता को चुनौती देना, इस्लामाबाद को अस्थिर करना और दीर्घकालिक संगठनात्मक ताकत तैयार करना शामिल है, ताकि अंततः तालिबान को हटाया जा सके। इसके अलावा, यह समूह मध्य और दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी अंतरराष्ट्रीय हमलावर क्षमता बनाए रखना चाहता है।
इस्लामाबाद मस्जिद विस्फोट
हालिया इस्लामाबाद मस्जिद हमला इसी पैटर्न में पूरी तरह फिट बैठता है, जिसमें सुरक्षा शून्य का फायदा उठाया जाता है। हमले के समय, बीएलए ने ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ (31 जनवरी से 8 फरवरी) शुरू किया हुआ था, जिसमें 12 पाकिस्तानी शहरों को निशाना बनाया गया और कथित तौर पर 100 से अधिक सुरक्षा कर्मी मारे गए। ऑपरेशन के समाप्त होने से ठीक दो दिन पहले, आईएसआईएस-के ने इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला किया, जिसमें 30 से अधिक लोग मारे गए और करीब 170 घायल हुए।
इस हमले का एक व्यापक रणनीतिक संदेश भी था। जनवरी 2026 में अमेरिका ने सीरिया और अफ्रीका में आईएसआईएस के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले शुरू किए थे, जिससे विशेष रूप से साहेल क्षेत्र में आईएसआईएस के सहयोगी गुटों को भारी नुकसान हुआ। ऐसे में दबाव में आए आईएसआईएस ने अपनी जीवंतता दिखाने के लिए इस हमले को अंजाम दिया। इस्लामाबाद हमला काबुल में एक चीनी रेस्तरां पर हुए आत्मघाती हमले के तुरंत बाद हुआ, जिसमें अफगान और चीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया था—जिसका उद्देश्य तालिबान-चीन संबंधों को कमजोर करना और यह संदेश देना था कि आईएसआईएस अब भी हमला करने में सक्षम है।
पाकिस्तान का असफल दांव
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 2017 में आईएसआईएस-के के साथ एक गुप्त समझ बनाई थी, जिसके तहत संगठन पाकिस्तान पर हमला नहीं करेगा और अपनी गतिविधियाँ केवल अफगानिस्तान तक सीमित रखेगा। लेकिन यह व्यवस्था जल्दी ही टूट गई और इसके बाद बलोचिस्तान के मस्तुंग में बलोच अवामी पार्टी की रैली पर हमला जैसे कई हमले हुए।
यह भी तर्क दिया जाता है कि पाकिस्तान ने आईएसआईएस-के को तालिबान और बलोच विद्रोहियों के खिलाफ एक ‘प्रॉक्सी’ के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की, जिससे उसे दोहरे लाभ मिल सकें—एक ओर दुश्मनों पर दबाव और दूसरी ओर गिरफ्तारियों व प्रत्यर्पण के जरिए कूटनीतिक लाभ, जैसे मार्च 2025 में आईएसआईएस-के कमांडर मोहम्मद शरीफुल्लाह को अमेरिका को सौंपना।
लेकिन यह रणनीति पूरी तरह विफल साबित हुई। लश्कर समूहों और आईएसआईएस-के के बीच समझौता कराने की कोशिशें भी नाकाम रहीं। संगठन के लिए अस्तित्व और वैचारिक कठोरता, सामरिक सहयोग से अधिक महत्वपूर्ण हो गई। आईएसआईएस-के के कुछ गुट अब भी क्षेत्रीय खिलाफत के लक्ष्य पर अडिग हैं, जिससे उनका अन्य आतंकी संगठनों से सीधा टकराव होता है। हाल ही में एक वरिष्ठ लश्कर कमांडर नजीबुल्लाह की आईएसआईएस-के द्वारा हत्या और इस्लामाबाद मस्जिद विस्फोट, इस पूरे गठजोड़ के टूटने को दर्शाते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
आईएसआईएस-के से उत्पन्न खतरा वास्तविक और लगातार बढ़ता हुआ है। पाकिस्तान में इसकी वापसी पूरे क्षेत्र—विशेष रूप से भारत—के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। यदि पाकिस्तान एक बार फिर गुप्त रूप से आईएसआईएस-के को कश्मीर की ओर मोड़ने का प्रयास करता है, तो खतरा और बढ़ जाएगा। जो घटना अलग-थलग आतंकी हमला लगती है, वह वास्तव में एक व्यापक और सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा है, जिसके लिए लगातार सतर्कता जरूरी है। पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा में अस्थिरता, सीमा-पार आतंकी गतिविधियों के लिए नए रास्ते खोल सकती है और भारत व अन्य देशों को निशाना बनाने वाले नए उग्रवादी नेटवर्क मजबूत हो सकते हैं।
(लेखक खुफिया एवं सुरक्षा विश्लेषण में विशेषज्ञ राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक हैं। व्यक्त किए गए विचार निजी हैं। उनसे srijansharma12@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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