बांग्लादेश ने विभाजन, मुक्ति संग्राम, अकाल, बाढ़, सैन्य तख्तापलट और लोकतांत्रिक पतन—सब कुछ झेला है। वह हर बार वापस खड़ा हुआ है। लेकिन वापस लौटना और समस्याओं का समाधान करना एक ही बात नहीं है। स्वतंत्रता के छप्पन वर्ष बाद भी एक मूलभूत विरोधाभास बना हुआ है: एक ऐसा राष्ट्र जिसकी उत्पत्ति पर अब भी बहस जारी है, वह अपने भविष्य को पूरी तरह आत्मसात नहीं…
