डॉ. राजेंद्र शेंडे

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एआई इम्पैक्ट समिट: क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रकृति की बुद्धि पर ग्रहण लगा देगी?

एआई न तो अनिवार्य त्रासदी है और न ही सुनिश्चित परिवर्तन। वह एक प्रवर्धक (एम्प्लिफ़ायर) है। इसलिए दिल्ली शिखर सम्मेलन को भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता को प्रस्तुत करना चाहिए — वे प्राकृतिक बुद्धि प्रणालियाँ, जिन्होंने एल्गोरिदम के आने से बहुत पहले जीवन को बनाए रखा। प्रकृति का भविष्य इस पर निर्भर नहीं करेगा कि हमारी मशीनें कितनी बुद्धिमान बनती हैं…

COP30 की कड़वी सच्चाई: तीस साल बाद भी हम नर्क की ओर जाने वाले रोडमैप ही बना रहे हैं

यूनएफसीसीसी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विफलता इसका उत्तरदायित्वहीन ढांचा है। गुटेरेस ने कहा था—“यह समय बातचीत का नहीं, क्रियान्वयन का है।” लेकिन जब देश क्रियान्वयन ही न करें तो क्या हो? 79 देश अब तक अपनी 2025 की NDCs जमा नहीं कर पाए—वह भी समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद। हैरानी की बात यह है कि इनमें भारत भी शामिल है—एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था जिसने…