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पाकिस्तान में मस्जिद पर हमला: उपमहाद्वीप में आईएसआईएस की बढ़ती छाया

आईएसआईएस-के (ISIS-K) से उत्पन्न खतरा वास्तविक है और लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान में इसकी दोबारा सक्रियता पूरे क्षेत्र—विशेष रूप से भारत—के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। यह खतरा तब और बढ़ जाता है, जब पाकिस्तान एक बार फिर गुप्त रूप से आईएसआईएस-के को कश्मीर की ओर मोड़ने का प्रयास करे। जो घटना अलग-थलग आतंकी वारदात प्रतीत होती है, वह वास्तव में एक व्यापक और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है, जिसके प्रति निरंतर सतर्कता आवश्यक है। पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा में अस्थिरता, सीमा-पार आतंकी गतिविधियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है और भारत व उससे आगे के क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले नए आतंकी मॉड्यूल मजबूत हो सकते हैं।

राजनीतिक बहिष्करण के बीच निर्णायक चुनावों की ओर बांग्लादेश: एक विभाजित राष्ट्र को लोकतांत्रिक नवीकरण की आवश्यकता

सभी संकेत बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की जीत की ओर इशारा करते हैं। अवामी लीग के बिना होने वाले एक प्रतिस्पर्धी चुनाव में, बीएनपी की संगठनात्मक गहराई और चुनावी पहुँच उसे सबसे आगे खड़ा करती है। लेकिन केवल जीत ही सत्ता और अधिकार में नहीं बदल सकती। अवामी लीग की अनुपस्थिति, निर्वासन से शेख़ हसीना का निरंतर प्रभाव, इस्लामी विकल्पों का उभार और गैर-निर्वाचित संस्थानों की केंद्रीय भूमिका—ये सभी कारक संकेत देते हैं कि कोई भी नई सरकार एक बुरी तरह बँटी हुई राजनीतिक व्यवस्था विरासत में पाएगी। 2026 का चुनाव बीएनपी की राजनीतिक किस्मत को पुनर्जीवित कर सकता है, लेकिन यह अपने आप में बांग्लादेश के लोकतांत्रिक घावों को नहीं भर पाएगा।

एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय: मलेशिया के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारत का उदय चीन की संरचनात्मक आर्थिक सुस्ती के साथ-साथ हो रहा है, जिससे एशिया का रणनीतिक परिदृश्य नए सिरे से आकार ले रहा है। मलेशिया के लिए विकल्प भारत और किसी अन्य देश के बीच नहीं है, बल्कि इस बात के बीच है कि वह भारत के उभार के लिए समय रहते तैयारी करे या फिर देर से अपने को ढाले। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा एक रणनीतिक मोड़ का प्रतिनिधित्व करती है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में संबंधों को गहरा करना केवल विवेकपूर्ण कदम नहीं है—बल्कि यह मलेशिया की दीर्घकालिक समृद्धि, सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की बुनियाद है।

विश्व क्रिकेट के लिए निर्णायक मोड़: शक्ति-राजनीति और दोहरे मानदंडों ने बांग्लादेश को भागीदारी से अनुचित रूप से वंचित किया

अंततः, टी20 विश्व कप के 10वें संस्करण से बांग्लादेश की अनुपस्थिति का कारण बीसीसीआई का अहंकार और आईसीसी के दोहरे मानदंड हैं, जहाँ निष्पक्षता और खेल भावना से अधिक महत्व शक्ति-राजनीति और चयनात्मक निर्णय-प्रक्रिया को दिया गया। हालांकि कई लोग बांग्लादेश के समर्थन में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की भूमिका को सकारात्मक मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह भारत का मुकाबला करने के लिए अपने रणनीतिक हितों के तहत उठाया गया कदम भी है। यदि मैच का बहिष्कार किया जाता है, तो बांग्लादेश को और अधिक वित्तीय तथा प्रशासनिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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