भारत को अपने चुनावों के इर्द-गिर्द राजनीतिक बयानबाज़ी की आवश्यकता नहीं है। उसे अपने चुनावी ढाँचे का स्वतंत्र, द्विदलीय और तकनीकी रूप से सक्षम ऑडिट चाहिए। उसे डेटा साझेदारी की पारदर्शी समीक्षा चाहिए। उसे विदेशी राजनीतिक सलाहकारों और डिजिटल फर्मों के लिए स्पष्ट कानूनी सीमाएँ चाहिए। और सबसे बढ़कर, उसे जनता का यह विश्वास फिर से स्थापित करना होगा कि सरकार सहमति से बनती है, गणना से नहीं।
