यूनएफसीसीसी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विफलता इसका उत्तरदायित्वहीन ढांचा है। गुटेरेस ने कहा था—“यह समय बातचीत का नहीं, क्रियान्वयन का है।” लेकिन जब देश क्रियान्वयन ही न करें तो क्या हो? 79 देश अब तक अपनी 2025 की NDCs जमा नहीं कर पाए—वह भी समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद। हैरानी की बात यह है कि इनमें भारत भी शामिल है—एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था जिसने संशोधित NDCs जमा नहीं कीं और दक्षिण एशिया में (अफगानिस्तान को छोड़कर) एकमात्र देश जिसने ऐसा नहीं किया। ये NDCs नए सामूहिक मात्रा-निर्धारित लक्ष्य (NCQG) की प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थीं।
